
न जाने क्यों,
जानकर भी, कि
गुजर रहा हूँ,
अनजान राहों में मै!
न जाने क्यों-
खुद से अनजान
बन जाता हूँ,मै
सोचता हूँ कि-
एक अलग
पहचान बनाऊ
इस दुनिया में मै-
मगर,जब जाता हूँ
दुनिया की उस भीड़ में
न जाने क्यों-?
खुद अपनी पहचान.
भूल जाता हूँ मै!
dheerendra,"dheer"
भूल जाना भी कभी कभी मुश्किल हो जाता है
जवाब देंहटाएंजो भूल पाता है वाकई में बहुत कुछ पा जाता है।
लाजवाब !!
baut sundar
जवाब देंहटाएंवाह क्या बात है...
जवाब देंहटाएंबढ़िया भाव .
जवाब देंहटाएंमोहब्बत नामा
मास्टर्स टेक टिप्स
असली समस्या अपनी पहचान के भूलने की है। उसका ध्यान रहे,तो भीड़ भी साथ देगी।
जवाब देंहटाएंबढ़िया भाव .
जवाब देंहटाएंयही तो त्रासदी है हमारे वक्त की बिना आई डी के घूमते हैं हम लोग .बढ़िया प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंअच्छी रचना .....
जवाब देंहटाएंभीड मे अलग रहना ही अच्छा है
जवाब देंहटाएंयूनिक तकनीकी ब्लाग
सुंदर भाव ...
जवाब देंहटाएंअच्छी रचना ..शुभकामनायें
दुनिया की उस भीड़ में
जवाब देंहटाएंन जाने क्यों-?
खुद अपनी पहचान.
भूल जाता हूँ मै!
भावनाओं का बहुत सुंदर चित्रण ....
पहचान तो फिर भी बनानी ही होगी... अन्ततोगत्वा...
जवाब देंहटाएंकोशिश करते रहें...
अच्छी प्रस्तुति।
-हेमन्त
....न जाने ये क्या हो गया, की सब कुछ लागे नया-नया.... ......... सुंदर अभिव्यक्ति.
जवाब देंहटाएंबहुत खूब ....
जवाब देंहटाएंउम्दा
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर अभिव्यक्ति......
जवाब देंहटाएं.......खुद अपनी पहचान भूल जाता हूँ मै....
जवाब देंहटाएंवाह ! बहुत खूब ... बधाई..
फिर भाई साहब भीड़ का अपना कोई चेहरा भी तो नहीं होता .पर हुआ क्या चेहरे का मेरे अपने .
जवाब देंहटाएंबहुत खूब कविवर ...
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर भाव अभिव्यक्ति...
जवाब देंहटाएंसुंदर अभिव्यक्ति......
जवाब देंहटाएंbeautifulll
जवाब देंहटाएंभीड़ जैसा नहीं बनना ...
जवाब देंहटाएंभावों की सुंदर अभिव्यक्ति ..
जवाब देंहटाएंसुंदर रचना ..
गागर सा समा गया है जैसे।
जवाब देंहटाएं............
International Bloggers Conference!
मगर,जब जाता हूँ
जवाब देंहटाएंदुनिया की उस भीड़ में
न जाने क्यों-?
खुद अपनी पहचान.
भूल जाता हूँ मै!
बहुत सुंदर ....!!
kyonki apni pahchan hamesha bheed se juda honi chahiye....isiliye bheed me khud ki pahchan bhul jate hain .....
जवाब देंहटाएंभावमय करते शब्दों का संगम ... बेहतरीन प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंएक अलग पहचान के लिए आदमी अपनी खुद की ही पहचान खो देता है.....!
जवाब देंहटाएंसुन्दर प्रेअर्नादायक रचना...!!
nice presentation.
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