गुरुवार, 29 मार्च 2012

बस! काम इतना करें....


बस! काम इतना करें,

अपने गम को और कम कितना करें
शेष तुम कहो हम कम उतना करे,

है पता मुझको तेरे रूठ जाने का
प्यार भी आखिर रोज कितना करें,

पाप-पुण्य का होता कोई माप नही
तौल-धरम का हिसाब ऐसे में कितना करें,

बात नही अगर कोई छुपाने की
जमाने से डर फिर कितना करें,

तुम हमे भूलो हम तुम्हे भूलें
हो सके तो बस! काम इतना करें,


DHEERENDR,:"dheer"

24 टिप्‍पणियां:

  1. है पता मुझको तेरे रूठ जाने का
    प्यार भी आखिर रोज कितना करें,

    बहुत खूब पंक्तियाँ ।लाजबाब ।

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  2. कोमल अभव्यक्ति सुन्दर भाव बधाई .....

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  3. कल 31/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. अपने गम को और कम कितना करें.......उपरोक्त प्रस्तुति हेतु आभार..............

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  5. है पता मुझको तेरे रूठ जाने का
    प्यार भी आखिर रोज कितना करें,waah....bahut accha vaise pyar me ruthna
    manana to chalte rahta hai...bahut acchi prastuti...dhirendra jee thanks nd aabhar.

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  6. हो गई है रीत अब तो, काम अब कितना करें।
    आओ अबू आराम करलें, काम अब इतना करें।।
    बहुत सुन्दर गज़ल!

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  7. सही है भाई ।

    पाप पुन्य के सन्दर्भ में--बेचारे--

    ये

    धर्म-कांटे भी हिसाब कितना करें ।

    बहुत बहुत बधाई ।

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  8. बहुत सुन्दर.....
    मगर ये छोटा सा काम है बड़ा मुश्किल....

    सादर

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  9. तुम हमे भूलो हम तुम्हे भूलें
    हो सके तो बस! काम इतना करें,

    bas itna hi kaam ho jaaye to behrat hai donon ke liye...!

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  10. पाप-पुण्य का होता कोई माप नही
    तौल-धरम का हिसाब ऐसे में कितना करें !!
    Achchi abhivyakti, shubhkaamnayen.

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  11. बात नही अगर कोई छुपाने की
    जमाने से डर फिर कितना करें,

    sach kaha !

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  12. है पता मुझको तेरे रूठ जाने का
    प्यार भी आखिर रोज कितना करें,

    ....बहुत खूब! ख़ूबसूरत प्रस्तुति...

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  13. "पाप-पुण्य का होता कोई माप नही
    तौल-धरम का हिसाब ऐसे में कितना करें,"

    वाह..सुंदर भावपूर्ण रचना.. !!

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  14. तुम हमे भूलो हम तुम्हे भूलें
    हो सके तो बस! काम इतना करें,


    बहुत खूब

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  15. है पता मुझको तेरे रूठ जाने का
    प्यार भी आखिर रोज कितना करें

    बहुत खूब लिखा है ..बधाई

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  16. बहुत खूब.. लाजबाब प्रस्तुति....बधाई धीरेन्द्र जी..

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  17. पाप-पुण्य का होता कोई माप नही
    तौल-धरम का हिसाब ऐसे में कितना करें,
    sach me

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  18. पाप-पुण्य का होता कोई माप नही
    तौल-धरम का हिसाब ऐसे में कितना करें,
    दुविधा वाली स्थिति है। इसी में राह बनाना है।

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  19. है पता मुझको तेरे रूठ जाने का
    प्यार भी आखिर रोज कितना करें,...

    बहुत खूब ... क्या बात कही है .. पर वो इस बात को नहीं मानेंगे ... प्यार के बदले प्यार जो चाहते हैं ...

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  20. वाह! क्या बात है.
    बहुत सुन्दर सटीक प्रस्तुति.

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