दो क्षणिकाऐ,
कर्म-रहस्य,
यश
कर्म की प्रेरणा है,
उपलब्धि नही!
फल
कर्म की संगति है
परिधि नही
प्रेम
कर्म की साधना है,
नियति नही!
प्रमाण,
संयम का कष्ट
कितनी संतुष्टि देता है?
और
संतुष्टि का संयम
कितना कष्ट देता हैं?
क्या
कष्ट की भी संतुष्टि होती है
हां
मेरा जीवन
इसका प्रमाण है!
DHEERENDRA"dheer"
कर्म-रहस्य,
यश
कर्म की प्रेरणा है,
उपलब्धि नही!
फल
कर्म की संगति है
परिधि नही
प्रेम
कर्म की साधना है,
नियति नही!
प्रमाण,
संयम का कष्ट
कितनी संतुष्टि देता है?
और
संतुष्टि का संयम
कितना कष्ट देता हैं?
क्या
कष्ट की भी संतुष्टि होती है
हां
मेरा जीवन
इसका प्रमाण है!
DHEERENDRA"dheer"
